इस दुनिया में ज्यादातर लोगों को एक ये भी शिकायत रहती है कि लोग उनकी कदर क्यों नहीं करते ? इसका बहुत सरल जवाब है क्योंकि आप खुद की कदर नहीं करते यही कारण है कि लोग भी आपकी कदर नहीं करते। आप सभी मनुष्यों से आज मैं एक विशेष बात कहना चाहूंगी आपको आपसे बेहतर कौन जान सकता है ? जब आपको भूख लगती है तो आपको पहले एहसास होता है,जब आपको चोट लगती है तो उस दर्द को आप महसूस करते हो ना की कोई और। मैं यही समझाना चाहती हूँ आपकी अहमियत को लोग तभी समझेंगे जब आप स्वयं अपनी अहमियत को समझेंगे। वरना लोग यही समझेंगे जिसे खुद से प्यार नहीं,जिसे खुद अपनी जिंदगी की कदर नहीं वो क्या दूसरों की कदर करेगा।
आज कल रिश्ते बस नाम के रह गए है,क्योंकि लोग स्वार्थ और अहंकार से वशीभूत हो चुके है। बहुत कम ही ऐसे लोग मौजूद है जो अपने हर रिश्ते की कदर करना बखूबी जानते है। वरना ज्यादातर लोग हर रिश्ते में पहले अपना फायदा ढूंढ़ते है यही कारण है जो आज के रिश्ते कांच की तरह नाजुक हो गए है।
कदर पाने के लिए तुम्हें खुद को बदलना होगा,लोग क्या कहते है उसे नजरअंदाज करना होगा,जिस दिन तुम्हें अपनी जिंदगी से प्यार हो जाएगा,अच्छे-बुरे की परख जब तुम्हें समझ आ जाएगा फिर इंसानियत का भाव तुम्हारे अंदर समां जाएगा उस पल से लोगों को तुम्हारी अहमियत और कदर का पता चल जाएगा।
उन बातों को मत सोचो जो तुम्हें तकलीफ पहुंचाती है,उन लोगों को याद मत करो जिन्हें याद करने से तुम्हारी आंख नम हो जाती है,उन बीती बातों को भुला दो जिससे तुम्हारा आज और आने वाला कल बेजार हो रहा है। याद रहे हम किसी को इस दुनिया में बदल नहीं सकते,क्योंकि ये संभव नहीं मगर जिस दिन हम खुद को बदल देंगे उस दिन से हमें ये दुनिया बदलती नजर आएगी। तुम्हें खुश रहने से किसने रोका है ? अपनी जिंदगी के मालिक तुम खुद हो मगर सदैव याद रखना हम वही प्राप्त करते है जो हम दूसरों को देते है अर्थात प्यार सम्मान दोगे तो बदले में वही पाओगे यदि नफरत तिरस्कार दोगे तो बदले में तुम भी वही पाओगे।
लोगों को कैसे और कब होगा तुम्हारी कदर का एहसास ?
जब लोग तुम्हारी कमजोरी जान लेते है तो वो उसका फायदा उठाते है,उन्हें पता है तुम्हें किस बात से ज्यादा तकलीफ होगी,किस बात का असर तुम पर ज्यादा होगा। इसलिए इंसान को अपनी हर बात,अपने हर राज किसी से जाहिर नहीं करनी चाहिए। अक्सर ज्यादा बोलना हर पल किसी के लिए समय निकालना इंसान की अहमियत को कम कर देता है, लोग ये सोचते है ये तो हमेशा फ्री रहता है इसे जब चाहो किसी भी कार्य के लिए बोल दो, इससे कुछ भी कह दो इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यही कारण है लोग दिल से सोचने वालों को बेवकूफ समझते है। क्योंकि ऐसे लोग जल्दी किसी को किसी भी काम या बात के लिए ना नहीं कह पाते है,क्योंकि दिल से सोचने वालों को लगता है किसी को हमारा ना कहना बुरा ना लग जाए।
याद रखना जिंदगी के हर फैसले दिल से नहीं लेते,कुछ फैसले दिमाग से भी लिए जाते है,क्या तुम्हारे लिए तुम्हारे दिल की कोई अहमियत नहीं ? क्यों तुम हर किसी को अपने दिल में स्थान देते हो ? दिल के अंदर बसने वाले हमारे अपने होते है जिससे हमें कोई खतरा या भय नहीं होता क्योंकि व्यक्ति का दिल सबसे नाजुक होता है बहुत कोमल होता है इसलिए हमें बहुत सोच समझ कर ही अपने दिल में किसी को स्थान देना चाहिए।
बहुत से फैसले दिमाग से लेना बेहतर होता है शायद आपको पता नहीं मगर भगवान भी हर फैसले दिल से नहीं लेते क्योंकि यदि ईश्वर ऐसा करते तो संसार में आज केवल असुरों का स्थान होता। समस्या केवल इतनी है कि मनुष्य को सब कुछ एक खेल नजर आता है चाहे परिणाम कुछ भी हो,कुछ लोग किसी के दिल से खेलते है तो कुछ लोग किसी की जिंदगी से खेलते है यही कारण है आज इस कलयुग में हर रिश्ता बस नाम का है,मतलब का है। जब तक आप खुद में परिवर्तन नहीं करेंगे आप किसी भी समस्या या तकलीफ से उबर नहीं पाएंगे। लोगों को अपनी कदर का एहसास कराना चाहते हो तो पहले अपनी सोच को बदलो।
दिल से सोचने वाले मेरी बातों पर ध्यान दे -
माना कि आप बहुत अच्छे दिल के हो मगर इस अच्छाई को ऐसे लोगों के लिए रखो जिन्हें तुम्हारे दिल की कदर हो,माता पिता,भाई-बहन इन सभी को प्यार और सम्मान दो क्योंकि कोई समझे ना समझे मगर आपके अपने एक ना एक दिन आपको अवश्य समझेंगे। दुनिया में कुछ ऐसे मतलबी लोग भी मौजूद है उनसे दूर रहो जो तुम्हें नहीं समझते और केवल काम के लिए अपने फायदे के लिए तुम्हारा इस्तेमाल करते है। ऐसे लोगों को ना कहना सीखो जो बस खुद के फायदे के लिए दूसरों को तकलीफ पहुंचाते है। छोटी-छोटी बातों से परेशान होना बंद करो। यदि तुम सही हो तुम्हारी अच्छाई रंग अवश्य लाएगी जिन्हें आज तुम्हारी अच्छाई की कदर नहीं एक दिन जिंदगी ऐसे लोगों को तुम्हारे वास्तविक परिचय से रूबरू कराएगी।
Author- 💥Snehajeet Amrohi✍
Most people in this world share a common grievance: why do others not value them? The answer to this is quite simple: because you do not value yourself; and that is precisely why others do not value you either. Today, I would like to share a special thought with all of you: who could possibly know you better than you know yourself? When you feel hungry, you are the first to realize it; when you get hurt, it is *you* who feels the pain—not anyone else. What I wish to convey is this: people will only recognize your worth when you, yourself, recognize your own worth. Otherwise, people will simply conclude that someone who lacks love for themselves—someone who does not value their own life—can hardly be expected to value others.
Nowadays, relationships exist merely in name, as people have become enslaved by selfishness and ego. There are very few individuals who truly know how to cherish every relationship they have. Otherwise, most people prioritize their own self-interest in every connection—and this is precisely why modern relationships have become as fragile as glass.
To earn respect, you must transform yourself and disregard what others say. The day you fall in love with your own life—when you gain the discernment to distinguish between right and wrong—the spirit of humanity will take root within you. From that very moment, people will recognize your true worth and significance.
Do not dwell on thoughts that cause you pain; do not think of those people whose memory brings tears to your eyes; and let go of the past events that are casting a shadow over your present and your future. Remember, we cannot change anyone in this world—for that is simply not possible—but the day we change ourselves, we will see the world around us begin to change. Who is stopping you from being happy? You are the master of your own life; yet, always bear in mind that we receive exactly what we give to others. That is to say, if you offer love and respect, you will receive the same in return; conversely, if you offer hatred and disdain, you will receive nothing less than the same in return.


