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1. क्यों अधूरी रह जाती है जीवन की यात्रा ?
जीवन एक ऐसी यात्रा हैं, जिसमे हमे अनेको परीक्षाओ से हो कर गुजरना पड़ता हैं,इतनी सरल नहीं हैं जीवन की यात्रा। जीवन में हमे एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भूल कर भी हमसे कोई गलती या अपराध ना हो क्योकि यदि भूल से भी कोई गलती या अपराध हो गया तो हमारा सारा जीवन व्यर्थ हो सकता हैं,जो हमे कभी कोई सुखद परिणाम नहीं दे सकता।
हमारे जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते जाते रहते हैं मगर यदि हम उस उतार-चढ़ाव को देख हिम्मत नहीं हारते तो हमारा जीवन हमे कई सीख दे जाता हैं,जिस सीख को पा कर हमारा जीवन धन्य हो जाता हैं,और हमे जिंदगी जीने के सही मायने मिल जाते हैं।
ये जीवन एकमात्र तुम्हारा जीवन नहीं क्योकि तुम्हारे जीवन से ही तुम्हारे परिवार का भी जीवन जुड़ा हैं,इसलिए अपने जीवन को ऐसी दिशा प्रदान करो जिससे तुम्हारे परिवार को और तुम्हे अपने जीवन की यात्रा में कोई कष्ट या पीड़ा का अनुभव ना हो। इस जिंदगी में यदि तुमने कोई भूल कर दी तो आजीवन तुम्हे उस भूल के लिए प्राश्चित की अग्नि में जलना होगा इसलिए स्वयं की आदतों पर खास ध्यान देने की जरुरत हैं, ताकि कोई भी बुरी आदत तुम्हे अपनी आदतों का शिकार ना बना सके।
2. किसके बिना हैं जीवन की यात्रा अधूरी ?
अध्यात्म जगत में रूचि रखने वाले लोग कभी निराश नहीं हो सकते क्योकि अध्यात्म एक ऐसा प्रकाश हैं जो घने अंधकार को भी पल भर में प्रकाश से भर देता हैं। इसलिए जो इंसान आध्यात्मिक होते हैं,वो कभी किसी का अहित करने का विचार अपने मन में नहीं लाते हैं,क्योकि अध्यात्म जगत में कदम रखने वाला स्वयं ही ईश्वर की संरक्षण में रहने लगता हैं उसका मार्गदर्शन स्वयं ईश्वर करते हैं,जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति या नकारात्मक विचार उसे अपनी तरफ आकर्षित नहीं कर पाते हैं।
तुम जब किसी गाड़ी में सफर तय करते हो,तो तुम बार-बार यही पता करते हो कि वो गाड़ी तुम्हे सही समय पर पहुंचाएगी या नहीं, जब वो गाड़ी चलते-चलते बीच में रुक जाती हैं तो तुम्हे लगता हैं,कब ये गाड़ी फिर से चल पड़े ताकि तुम समय पर अपने स्थान पर पहुंच सको।
ठीक वैसे ही तुम्हारा जीवन एक यात्रा हैं,जिसमे कई उतार-चढ़ाव हैं,कई समस्याएं हैं,यदि तुम्हे इस जीवन की यात्रा को सुखद बनाना हैं तो सर्वप्रथम तुम्हे स्वयं में एक बेहतर बदलाव लाना होगा, जैसे अपने दिनचर्या को सुधारना,समय का सदुपयोग करना,बड़ो का सम्मान करना,बुरी आदतों से और बुरे रास्तो से दूर रहना, तथा अध्यात्म जगत में रूचि रखना,जिससे तुम्हे सही दिशा का बोध हो सके,तुम्हारे ज्ञान शक्ति का विस्तार हो सके क्योकि अध्यात्म के बिना किसी का भी जीवन सही दिशा की तरफ नहीं बढ़ सकता।
आज जो देश और दुनिया की हालत हैं वो काफी गंभीर और एक चिंता का विषय बन चुका हैं,क्योकि हर तरफ दंगे,लड़ाई और युद्ध जैसी परिस्थिति बनी हुई हैं, जिसमे कई देश बर्बाद हो चुके हैं और कई लोग अपनी जान भी गवा चुके हैं। यदि इस संसार में हर व्यक्ति का मार्गदर्शन उचित प्रकार होता तो कोई भी व्यक्ति आज एक अपराधी या आतंकवादी नहीं होता। यदि अध्यात्म जगत से सारा विश्व अवगत होता तो आज सारा विश्व इस घोर अंधकार से दूर होता।
3. हमें जीवन जीने की सही राह कहां से प्राप्त होता है ?
अध्यात्म जगत से ही हर व्यक्ति को जीने की सही राह मिलती हैं, क्योकि संस्कार, अच्छे व्यवहार, और अच्छे कर्मो का चुनाव एक आध्यात्मिक व्यक्ति ही कर सकता हैं, जो ईश्वर में विश्वास रखता हैं,जिसे सही और गलत का आकलन करना आता हैं, जो किसी से भयभीत नहीं हो सकता,जो किसी स्वार्थ और लोभ की माया में नहीं उलझ सकता,जो किसी की पीड़ा का कारण नहीं बन सकता,जो अपनी दिनचर्या को कभी बदल नहीं सकता,जो समय का पालन करता हैं,असल जिंदगी में वो आध्यात्मिक कहलाता हैं।
इस युग परिवर्तन में भागदौड़ भरी जिंदगी में तुम्हे खुद के लिए समय का सही उपयोग करना नहीं आता तो मान लेना तुम अपनी जीवन की यात्रा को खतरे में डालने का प्रयास कर रहे हो। खुद को समय दो,अध्यात्म जगत में एक बार अपना रुझान बढ़ा कर देखो तुम्हे सत्य का अनुमान स्वतः हो जाएगा तुम्हारा परिचय तुम्हारे जीवन की यात्रा से हो जाएगा, तुम्हारे जीवन का अंधकार मिट जाएगा,तुम्हारा जीवन अध्यात्म के प्रकाश से भर जाएगा।तुम्हे हर समस्या का समाधान मिल जाएगा।

