शिक्षा का शिखर।

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** 1. शिक्षा कैसे आपको शिखर तक ले जाती है ?


शिक्षा एक ऐसा वरदान हैं,जिसे पाना जितना कठिन हैं,उससे कहीं ज्यादा कठिन हैं,उसका उचित पालन कर अपने जीवन में आगे बढ़ना,यदि  शिक्षा का उचित पालन नहीं किया, तो वो शिक्षा तुम्हारे लिए एक एक वरदान की जगह अभिशाप भी बन सकती हैं,और यदि तुमने शिक्षा का उचित पालन कर उस ज्ञान अमृत को ग्रहण कर लिया तो यही शिक्षा एक दिन तुम्हे शिक्षा के उच्च शिखर तक ले जाती हैं। 


जैसा कि तुम सब जानते हो एक पेड़ विशालकाय स्वरुप में तभी आता हैं,जब उस पेड़ की जड़े मजबूत होती हैं,उससे पूर्व तुम्हारे लिए ये जानना आवश्यक हैं, कि जो विशालकाय पेड़ तुम्हे आज अपनी छाया प्रदान कर रहा,शुरुआत में वो पेड़ पहले एक छोटा सा पौधा था, जिसकी जड़े इतनी मजबूत नहीं थी।


मगर कुछ संघर्ष के बाद आंधी,बारिस,तूफान और तेज हवा के बहाव में भी उस पौधे ने काफी संघर्ष किया,फिर समय बीतने के बाद वो नन्हा सा पौधा एक विशालकाय वृक्ष के रूप में आज सबको अपनी ठंडी छाया प्रदान कर रहा हैं।


 समझने वाले समझ गए होंगे मैं क्या समझाने का प्रयास कर रही हूँ। फिर भी जिन्हे मेरी बाते यदि समझ नहीं आई तो मैं विस्तारपूर्वक सरल शब्दों में इसे समझाने का प्रयास करती हूँ।जैसे तुम अपनी बाल्यावस्था में जब विद्यालय जाते थे, तो तुम्हे वहां अनेको परीक्षाओं से गुजरना पड़ता था, जैसे कभी तुम्हे कोई विषय कठिन प्रतीत होता था तो तुम उस विषय से अपनी रूचि हटाने का प्रयास करते थे,मगर जब अपने गुरुजन द्वारा तुम्हे डांट पड़ती थी,या तुम्हे दंडित किया जाता था,तो तुम उस विषय को गंभीरता से समझने का प्रयास करते थे,तुम्हारी कई परीक्षाएं तुम्हारे शिक्षको द्वारा ली गई ,जब तुम्हे इसमें सफलता हासिल हो जाती हैं,तो तुम अपनी शिक्षा के प्रति कोई भी लापरवाही नहीं बरतते और एक दिन तुम बड़े हो कर अपनी पूरी शिक्षा पूर्ण कर लेते हो,फिर तुम्हे कोई भी भय का संकोच नहीं होता,क्योकि अब तुम एक शिक्षित व्यक्ति बन चुके हो।


 मगर मेरी बात यही पर खत्म नहीं होती,शिक्षा पूर्ण होने के बाद भी तुम्हारी एक परीक्षा बाकि हैं,जिससे इसका पता चलेगा कि तुमने अपने स्कूल,कॉलेज की तो शिक्षा प्राप्त कर ली मगर तुम्हारी शिक्षा का सफर यही खत्म नहीं होता,अभी शिक्षा से शिखर तक का रास्ता बाकि हैं,अभी तुम्हारी सबसे अहम परीक्षा बाकि हैं। 


माना कि तुमने बड़ी डिग्रियां हासिल कर ली, माना कि तुम अपनी स्कूल और कॉलेज की शिक्षा में सफलता हासिल कर चुके हो मगर जो वास्तविक ज्ञान की सबसे अहम शिक्षा हैं, जिसका महत्त्व सबसे अधिक माना गया हैं,जिसकी तुम्हारी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हैं,क्या तुमने उस सर्वोच्च शिक्षा को ग्रहण किया हैं ? जो तुम्हे शिक्षा के शिखर तक ले कर जा सकता हैं,जिसके बगैर तुम्हारी ये किताबी ज्ञान ये डिग्री भी अधूरी मानी गई हैं, क्या तुम वाकई शिक्षा से शिखर तक पहुंच पाने में सफल हो पाए हो ?


* सर्वदा स्मर्यतां यत् शिक्षा एतादृशं बहुमूल्यं अमूल्यं च रत्नम् अस्ति यत् सर्वे तत् सम्भालितुं अवशोषयितुं च न शक्नुवन्ति।


अर्थात, ''सदैव याद रखना शिक्षा एक ऐसी बहुमूल्य और अनमोल रत्न हैं, जिसे संभाल पाना और ग्रहण कर पाना सबके बस की बात नहीं।''  


कहने का तात्पर्य ये हैं कि कुछ मनुष्य शिक्षा तो ग्रहण कर लेते हैं,मगर वो शिक्षा के अभिमान में इतना चूर रहते हैं कि,छोटे-बड़े सबका अपमान कर देते हैं,यदि अपनी शिक्षा के बल पर उन्हें कोई बड़ी जॉब,या ऊंचा बड़ा पद संभालने मिल गया तो उनमे अहंकार आ जाता हैं,उनका यही अहंकार शिक्षा से शिखर तक के सफर में उनका बाधक बनता हैं जो उन्हें आसमान की बुलंदियों तक पंहुचा कर फिर वापस से धरा पर ला कर खड़ा कर देता हैं। यदि शिक्षा को किसी के हित के लिए प्रयोग किया जाता हैं तो वो शिक्षा तुम्हे शिक्षा के शिखर तक ले जाती हैं, यदि इतना शिक्षित होने के बावजूद भी तुम्हारे अंदर जरा भी अहंकार नहीं तो मान लेना तुमने शिक्षा से शिखर तक पहुंचने का मार्ग ढूंढ लिया हैं, जिसकी बुलंदी आसमान तक को छू जाती हैं। 


** 2. शिक्षा से शिखर तक का रास्ता -


यदि वाकई तुमने सर्वोच्च शिक्षा ग्रहण किया हैं तो तुम भलीभाति जानते हो जो शिक्षा सदैव तुम्हे अधर्म और गलत रास्ते से दूर रखती हैं,वही शिक्षा सर्वोच्च शिक्षा कहलाती हैं। जिस शिक्षा को ग्रहण कर तुम सदैव अपने बड़े बुजुर्गो का,माता-पिता का सम्मान करते हो, वही शिक्षा तुम्हे महान होने का दर्जा दिलाती हैं। जिस शिक्षा के बदौलत तुम किसी में भेदभाव नहीं रखते हो,सदैव सबकी सहायता के लिए तत्पर रहते हो,वही शिक्षा एक दिन तुम्हे बुलंदियों तक ले जाती हैं। 


** 3. किसे मिलता है आदर्शवादी कहलाने का दर्जा ?


जिस शिक्षा को ग्रहण कर तुम अपनी वाणी में संयम रखना जानते हो वही शिक्षा तुम्हे आदर्शवादी कहलाने का दर्जा दिलाती हैं। जिस शिक्षा को ग्रहण कर तुम्हारे अंदर काम,क्रोध,लोभ,माया जैसे विकार नहीं आते,जिस शिक्षा को ग्रहण कर तुम अभिमान नहीं करते,जिस शिक्षा को ग्रहण कर तुम अपने कर्तव्यों से मुख नहीं मोड़ते तथा अपनी इंसानियत को नहीं भूलते,वही शिक्षा तुम्हे एक दिन शिक्षा के शिखर तक पंहुचा जाती हैं। 



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