"क्रिसमस का इतिहास'' History Of Christmas.

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क्रिसमस, जो ईसा मसीह के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, एक ऐसा त्योहार है जिसका इतिहास समय के साथ विविध संस्कृतियों और मान्यताओं के मिलन से बना है। आज यह सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि परिवार, दोस्तों और समुदाय के साथ फैलाव और त्योहार की खुशियों का वैश्विक प्रतीक बन गया है।


प्रारम्भिक पृष्ठभूमि रोमन लोगों में Saturnalia जैसे त्योहार गहरे सर्दियों के अंधेरों में खुशी-खुशी मनाए जाते थे—दावतें, उपहार, और सामाजिक मानदंडों से मुक्त हास-परिहास। कई इतिहासकार मानते हैं कि ईसाई समुदायों ने इन लोकाचारों को अपने त्योहारों के साथ ईसाई धर्म के संदेश को और लोगों तक पहुँचाया जा सके। इसी अवधि के दौरान 4वीं सदी के आसपास ईसाई चर्च ने 25 दिसंबर को यीशु मसीह के जन्म दिवस के रूप में मान्यता दी, ताकि नए धर्म और पारंपरिक उत्सव दोनों के बीच एक संभाषण स्थापित हो सके।ईसाई मान्यताओं का स्थापित होना 25 दिसंबर को क्रिसमस के रूप में मनाने की कानूनी और धार्मिक स्वीकृति धीरे-धीरे पूरे यूरोप और बल्कि विश्व में फैलती गई। इस तारीख का चयन कुछ हद तक solstice (दिन के सबसे छोटे अंधकार दिन) के समय से प्रेरित माना गया, ताकि प्रकाश और नई आशा के प्रतीक के रूप में यीशु के जन्म की कथानक को संस्थापित किया जा सके। समय के साथ क्रिसमस सिर्फ जन्म के उत्सव से बढ़कर एक सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन बन गया, जिसमें परिवार, दोस्त और समुदाय एक साथ आते हैं।


मध्ययुगीन यूरोप और परंपराओं का आगमन,मध्ययुग में क्रिसमस एक बड़ा और सार्वजनिक उत्सव बन गया। चर्चों में विशेष मिस्सा, Nativity (जन्म कथा) दृश्यों की प्रस्तुति, और गीत-संवाद का चलन बढ़ा। क्रिसमस–आदि उपहारों की परंपरा  द्वारा यीशु को दिए गए उपहारों के प्रतीक के रूप में जोड़ी गई, और सामान्य लोगों के बीच भी प्रेम, दयालुता और साझा करने की भावना जड़ पकड़ने लगी। किन्तु यूरोप में कुछ समय के लिए धार्मिक कठोरताएं और क्रिसमस के विरोधी विचार भी देखे गए; Puritan आंदोलन ने क्रिसमस काउत्सव थोड़े समय के लिए दबाव में डाल दिया। फिर 19वीं सदी में पुनर्जागरण के साथ क्रिसमस एक बार फिर लोकप्रिय और रोमांचक बना।यूरोप से विश्व भर में फैलना: ट्री, गिफ्ट, और कारोल्स क्रिसमस ट्री का प्रचलन जर्मनी में शुरू हुआ, जिसे बाद में यूरोप और फिर उत्तरी अमेरिका में अपनाया गया। पेड़ को लाइटों, सजावटों, और फूलों से सजाकर घर-घरों और चर्चों में रखा गया। 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में विक्टोरियन युग में क्रिसमस ट्री की परंपरा व्यापक रूप से लोकप्रिय हुई, जिसकी वजह से यह त्योहार का एक प्रमुख प्रतीक बन गया। साथ ही उपहार देने की परंपरा, बच्चों के लिए क्रिसमस की stocking, और Carols (क्रिसमस गीत) ने भी उत्सव को और जीवंत कर दिया।





''आधुनिक काल में परिवर्तन 20वीं सदी ने क्रिसमस को एक वैश्विक दृश्य दिया''


 विज्ञापन, मीडिया और उपभोक्तावादी संस्कृति ने इसे एक बड़े पैमाने पर विपणन और आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बना दिया। सांता क्लॉज़ का आधुनिक चित्रण—उत्तरी ध्रुव का रहने वाला,—कई देशों के बच्चों के क्रिसमस अनुभव का एक अहम भाग बन गया। इसी दौरान दयालुता,और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विचार भी जोर से सामने आए—निःस्वार्थ दान, जरूरतमंदों की सहायता, और कम-से-कम Christmas पर एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति दिखाने की परंपरा।वैश्विक विविधताएं और स्थानीय रंग क्रिसमस विश्व के अनेक देशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर यह धार्मिक उत्सव के रूप में अधिक महत्व का है, तो कुछ जगहों पर यह एक पारिवारिक और secular (धार्मिक नहीं) उत्सव के रूप में ही देखने को मिलता है। 


उदाहरण के तौर पर:- कई पश्चिमी देशों में क्रिसमस ईसाई परंपराओं के साथ-साथ परिवारिक मिलन और कार्ड-गिफ्टिंग का समय बन गया है।- भारत में ईसाई समुदाय के साथ-साथ अन्य लोग भी परिवारिक मिलन, उपहार और मीठे पकवानों के साथ क्रिसमस मनाते हैं, और कई जगहों पर स्थानीय रीति-रिवाजों का समन्वय भी देखने को मिलता है। परिवारिक मिलन और दयापूर्ण कार्य संक्षेप में क्रिसमस एक ऐसा त्योहार है जो विश्वास, संस्कृति और मानवता के मूल्यों का सम्मिलन करता है। शुरू के धार्मिक उत्सव से निकलकर यह आज खुशियों, साझा करने, और एक-दूसरे के साथ संबंध मजबूत करने का वैश्विक अवसर बन चुका है। चाहे आप इसे धार्मिक रूप से मानें या secular रूप में, क्रिसमस एक ऐसी समय-बद्ध यादगार है जो हमें याद दिलाती है कि दया, प्रेम और सहयोग जैसी चीजें सदा के लिए प्रासंगिक हैं।





19वीं सदी के शुरुआती काल में बच्चों के लिए स्ट. निकोलस (St. Nicholas) की कहानी से फ़्रेम बना और 1823 की कविता “A Visit from St. Nicholas” ने आधुनिक सांता क्लॉज़ की छवि को जन्म दिया; बाद में लोकप्रिय मीडिया और विज्ञापनों ने इसे और व्यापक बना दिया।


- दुनिया भर में विविधताएं: -क्रिसमस के उत्सवों की ध्वनि और रंग हर संस्कृति में अलग होते हैं—यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जाते हैं।विश्वभर की कुछ परंपराएं भारत चर्चों में मध्यरात्रि मसी के पठन-प्रार्थना, परिवारों के साथ भोज, क्रिसमस की मिठाइयाँ और क्रिसमस पोट्रेट्स। 


क्रिसमस का इतिहास एक ऐसी कहानी है जिसमें धार्मिक परंपरा, सामाजिक रीति-रिवाज़, और सांस्कृतिक बदलाव एक साथ मिलकर एक वैश्विक त्योहार बनाते हैं—जो समय के साथ विकसित हुआ, पर मूल उद्देश्य रहा वही: प्रेम, करुणा और नए सप्ताह के स्वागत का जश्न।"






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