माना कि ये संसार का दस्तूर है मगर इसमें बेटियों का क्या कसूर है ?
माता पिता के लिए अपनी हर संतान प्यारी होती है चाहे बेटा हो या बेटी मगर हमारा समाज न जाने क्यों बेटियों को हमेशा पराया होने की संज्ञा देता है। आज मैं इसी अंधकार को दूर करने के लिए यहां प्रस्तुत हूँ सत्य से सबको अवगत करने के लिए प्रस्तुत हूँ। मैं भी एक बेटी हूँ मगर मैं खुद को अपने माता पिता के लिए पराई नहीं मानती चाहे मेरा विवाह हो भी जाए तो भी मैं खुद को अपने माता पिता के लिए पराई नहीं मानूंगी क्योकि हमारी सोच और हमारा व्यवहार ही हमें पराया बनाता है ऐसा मेरा मानना है। चाहे ससुराल हो या मायका हमारे विचार से ही वो हमें अपनेपन का बोध कराते है। यदि सास बहू के साथ माँ होने का फर्ज निभाती है तो वो सास नहीं बल्कि माँ ही होने का बोध कराती है यदि बहू बेटी होने का फर्ज निभाती है तो वो बहू नहीं बल्कि बेटी होने का दर्जा पाती है।
जिन माता पिता का कोई बेटा नहीं बल्कि बेटियाँ है आज मैं उन्हें ये आश्वासन देती हूँ कि ईश्वर ने कुछ सोच समझ कर ही आपको बेटा नहीं दिया बल्कि बेटियों को आपके पास भेजा क्योकि जो बेटा ना कर सका वो बेटियाँ करेगी। जरूरी नहीं विवाह के पश्चात बेटियों का संबंध माता पिता से खत्म हो जाता और केवल ससुराल का अधिकार बेटियों पर हो जाता है क्योकि जिन माता पिता को केवल बेटियाँ है उनके बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा ? यकीनन बेटियाँ ही बनेगी इसलिए बेटियों को कभी उदास नहीं होना चाहिए बल्कि दोनों कुल की मर्यादा और फर्ज को निभाना चाहिए।
समाज में कौन क्या कहता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि जिंदगी आपकी है परिवार आपका है समाज का नहीं। सदैव याद रखे कुछ बातें आपको अपने दिल में ही रखनी चाहिए क्योकि हर व्यक्ति का दिल साफ नहीं होता समाज में कई लोग तरह-तरह की बातें करते है आप किस-किस की सुनेगे और सफाई देंगे ? गैरो के लिए अपनों को चोट पहुँचाना सही नहीं होता।
विवाह कोई खेल नहीं और आपकी बेटियाँ कोई बाजार का सामान नहीं जिसे किसी भी हाथों में सौप दे, यदि आपकी बेटियाँ पढ़ना चाहती है कुछ बनना चाहती है तो उन्हें एक अवसर जरूर दे। याद रखे जरूरी नहीं आपके घर के चिराग से ही आपका नाम रोशन हो बेटियाँ किसी चिराग से कम नहीं होती क्योकि बेटियों से दोनों कुल रोशन होता है एक ससुराल और दूसरा मायका।


