सबकी माया से परे। Beyond Everyone's illusion.

World Of Winner
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वो है समस्त संसार का आधार,

जो न करते कभी अपनी मर्यादा को पार,

वो भेदभाव नहीं जानते,वो सबको एक समान मानते,

यूँही नहीं कहलाते वो देवों के देव,

क्योंकि मेरे महादेव छल और कपट को नहीं जानते। 



मौन है वो,विकराल है वो,

कण-कण में समाहित है वो,

दृश्य हो कर भी अदृश्य है वो,

कल्कि भी वो और महाकाल भी वो। 



परिचित होकर भी,जग है उनसे अपरिचित,

क्योंकि कल्कि की लीला का समय नहीं आया उचित,

जब कल्कि के परिचय से संसार होगा रूबरू,

सबके प्रत्येक कर्मो का हिसाब होगा वहीं से शुरू। 



बड़े से बड़े महाज्ञानी,संत महात्मा हो या अनुगामी,

कल्कि की वास्तविकता किसी ने न जानी,

जो आज कर रहे कल्कि के नाम से अपना प्रचार,

अपनी आँखों से हटाओं अहंकार की पट्टी एक बार। 



आदि है वो,अनादि है वो,अंत और आरंभ है वो,

प्रकृति भी जिसके समक्ष शीश झुकाती,

तीनों लोको के स्वामी है वो,

सत्पुरुषों का जो करते उद्धार,

दुष्टों का जो करते संहार,

धर्म की रक्षा के लिए लेते हर युग में वो अवतार। 



जो है शक्ति के अर्धांग,जिन्हें न सका कोई पहचान,

संसार के सभी जीव प्राणियों में बसता जिनका प्राण,

उनकी इस लीला को देख शक्ति भी हुई हैरान,

क्योकि संसार की रक्षा के लिए वो बने भगवान से इंसान। 



🔱Snehajeet Amrohi





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