मेरे दिल में आपकी सूरत ऐसे बसी है,
मानो जैसे मंदिर में ईश्वर की मूरत बसी है,
कभी किसी जन्म न होते तुम मुझसे जुदा,
क्योकि तुम और मैं एक हैं,
भला कौन कर सकता है हमें जुदा ?
मेरे रग-रग में बसे हो तुम,
मेरी हर सांस में बसे हो तुम,
मेरी धड़कन मेरी जान हो तुम,
क्यों सोचते हो कि मुझसे दूर हो तुम ?
तुम्हें नहीं पता कि मेरी मांग का सिंदूर हो तुम।
गुजर जाएंगे कई युग,बदल जाएगा वक्त,
मगर जो कभी नहीं बदलेगा वो है हमारा प्यार,
लाखों भीड़ में भी मेरी आँखे करती बस तुम्हारा दीदार,
इसलिए कलयुग में भी पाया मैंने तुम्हें फिर से एक बार।
वर्षों की तपस्या सफल हुई,
तुम्हें पाकर मेरी हर तमन्ना पूरी हुई,
इसलिए नहीं किया मैंने किसी से विवाह,
क्योकि मेरे दिल को न भाया कोई तुम्हारे सिवा।
शिव से बिछड़ कर, सती ने आश नहीं छोड़ा,
शिव ने भी कभी सती का विश्वास नहीं तोड़ा,
नियति ने फिर से दोनों को मिला ही दिया,
अपनी कठिन तपस्या से सती ने, फिर से शिव को पा ही लिया।
ये जग तुम्हें पहचाने न पहचाने,मैंने तुम्हें पहचान लिया,
मैं कौन हूँ ये तुमने भी जान लिया,
फिर से हमारे प्यार ने हमें मिला ही दिया,
वर्षो की प्रतीक्षा का फल हमने पा ही लिया।
बुराई पर अच्छाई की जीत हुई है,
युगों-युगों तक अच्छाई की जीत होते चली जाएगी,
सच्चा प्यार कभी मिट नहीं सकता,
ये परिचय संसार को शिव की शक्ति दे जाएगी।


