सास और बहू का अनोखा बंधन।

World Of Winner
0

 एक माँ ने अपने गर्भ में स्थान दिया, तो एक माँ ने मुझे अपने दिल में स्थान दिया, कौन कहता है कि नोक झोंक से भरे होते है, सास बहू के रिश्ते ? यदि दिल में करवाहट की जगह प्रेम हो,तो बेहद अटूट और मजबूत होते है, सास बहू के रिश्ते। 




(toc) #title=(Table Of Content)


1. रिश्ते के बीच संशय का स्थान नहीं होना चाहिए। 


चाहे दुनिया का कोई भी इंसान हो यदि उसके मन में किसी भी व्यक्ति के प्रति संशय जैसी भावना उत्पन्न होने लगती है, तो उसे एक अच्छा व्यक्ति भी बुरा प्रतीत होने लगता है, चाहे दुनिया का कोई भी रिश्ता हो यदि उस रिश्ते में कोई भी शक या संशय अपना स्थान बना लेता है, तो वो रिश्ता ना ही आगे बढ़ सकता है, और ना ही वो रिश्ता आपको कोई खुशी दे सकता है। 


आज हम जिस रिश्ते की बात करने जा रहे है, वो रिश्ता है, सास और बहू का रिश्ता। अक्सर कुछ लोग कहा करते है, एक सास कभी माँ का स्थान नहीं ले सकती, कुछ लोग ये भी कहते है, एक बहू कभी बेटी का स्थान नहीं ले सकती, क्योकि बहू तो पराई होती है। कुछ लोग कहते है, जो प्यार एक माँ अपनी बेटी को दे सकती है, वो स्नेह और प्यार एक सास कभी नहीं दे सकती, क्योकि सास कभी माँ की तरह लाड प्यार नहीं दे सकती क्योकि बेटियों का ससुराल कभी बेटियों को मायके के जैसा प्यार नहीं दे सकता क्योकि वो पराया स्थान होता है। सास- ससुर कभी माता-पिता का स्थान नहीं ले सकते, ननद,देवर ये सब कभी भाई-बहन का स्थान नहीं ले सकते। 


हमारे समाज में हर दिन ऐसी बातें होते रहती है, हर घर की कहानी लोग जानना चाहते है,तरह-तरह की बातें हमारे समाज में लोग करते रहते है, आज मैं इस दुनिया को हमारे समाज को एक सत्य से अवगत कराने जा रही हूँ जिसे जानने के पश्चात आप कभी किसी रिश्ते को शर्मशार करने की भूल कदापि नहीं करेंगे।  


2. आपकी सोच का रिश्ते पर कैसा असर होता है ?


सब आपकी नजरो और आपकी समझ का फर्क है, यदि दोष है तो आपके सोच का दोष है,आपके नजरिए का दोष है, क्योकि यदि हमारी सोच और हमारा नजरिया किसी भी रिश्ते के प्रति सही और नेक है फिर किसी रिश्ते में कोई दोष नहीं रहता।  


मान लीजिए आपके घर का दरवाजा आपको खोलना है, तो आप उसे हाथ से आराम से खोल सकते है मगर यदि आप दरवाजे को बंद करने के लिए अपने हाथ की जगह अपने पैर का प्रयोग करेंगे आप दरवाजे को अपने पांव से बहुत तेज बंद करने का प्रयास करेंगे तो यकीनन आपके पांव  को चोट आएगी और दरवाजा भी टूट सकता है, जो कार्य आप प्रेमपूर्वक कर सकते है जिससे किसी को नुकसान ना हो जिस काम को आप अपना मान कर कर सकते है उसे यदि आप किसी दूसरे का काम मान कर गुस्से से करेंगे तो यकीनन हमे ही चोट पहुंचेगी। आज हमारे समाज में सभ्यता, संस्कृति और संस्कार लुप्त होते जा रहे है, या मैं कहूं कि अब तहजीब और संस्कार नाम की कोई चीज है ही नहीं तो ये गलत नहीं होगा क्योकि बड़ो का सम्मान करना भेदभाव को दूर रखना ये सब लोग अब करते कहां है ?


3. कैसे मजबूत बन सकता है सास बहू का रिश्ता ?


मैं पूछती हूँ आप सभी से यदि आप किसी को सच्चे दिल से सम्मान और प्यार देंगे तो बदले में आपको भी सम्मान और प्यार ही मिलेगा। ये बस आपके मन की शंका है, कि ससुराल कभी मायके का स्थान नहीं ले सकता, सास कभी माँ की जगह नहीं ले सकती,यदि बेटियां अपनी सास में अपनी माँ को देख कर उन्हें सम्मान और प्यार देगी तो यकीनन सास भी बहू को बेटी से कहीं बढ़ कर प्यार देगी। 


विवाह उपरांत लड़कियां अपने पति को ही अपना सब कुछ मान लेती है,अपने पति पर पूरा अधिकार जताती है, उन बेटियों को एक बात अवश्य कहना चाहूंगी जिस पति पर तुम अपना अधिकार जता रही हो, वो पति पहले किसी का बेटा था, किसी का भाई था, तुमने अभी-अभी अपने पति के जीवन में कदम रखा है, फिर तुम कैसे अपने पति को उसके माता-पिता से दूर कर सकती हो, तुम कैसे अपने पति को उसके ही अपने भाई-बहन से दूर कर सकती हो ? क्या तुम्हारे पति ने कभी तुम्हे, तुम्हारे माता-पिता और भाई-बहन से दूर करने का प्रयास किया ? फिर कैसे तुम अपने ही पति के घर की सुख और शांति को भंग कर सकती हो ?


जो लोग मायके और ससुराल में भेदभाव करते है, ऐसे लोगो को एक बात कहना चाहूंगी जैसे तराजू अपनी तरफ की दोनों भार को बराबर रहने पर ही संभाल सकता है, वैसे ही दुनिया का हर रिश्ता होता है, दोनों की सतह एक बराबर होनी चाहिए यदि एक का भार अधिक हुआ और दूसरे का कम तो वो अपना संतुलन खो सकता है। 


प्यार सबको बदल देता है, क्योकि प्यार एक शीतल जल की भांति शांत और निर्मल होता है, जो भीषण से भीषण अग्नि को भी खुद में समा कर शांत कर देता है, फिर दुनिया का कोई भी रिश्ता कैसे नहीं संभल सकता ? देश की हर बहू को मैं यही कहना चाहूंगी तुम्हे प्रसन्न होना चाहिए कि तुम्हे एक साथ दो माँ का प्यार और ममता प्राप्त हो रहा, फिर तुम्हारे दिल में माँ और सास के बीच भेदभाव का विचार क्यों सता रहा ? 


अपने दृष्टिकोण को बदलो, भेदभाव से बाहर निकलो, यकीनन तुम्हे अपने हर सवाल का जवाब स्वतः ही प्राप्त हो जाएगा, और तुम्हारे दिल से रिश्तों के प्रति भेदभाव और शंका मिट जाएगा। 



Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)