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आप में से कुछ लोगों ने दुर्गा कवच का पाठ अवश्य किया होगा और आप भलीभाति कवच की महिमा से अवगत होंगे फिर भी आप में से कुछ लोग कवच के वास्तविक परिचय से अवगत नहीं हुए। आपने देवी भगवती दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए उनकी कृपा पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ भी अवश्य किया होगा मगर आप सम्पूर्ण ज्ञान को अबतक खुद में समाहित नहीं कर सके जिसका प्रमाण जीता जागता आप सबके समक्ष है फिर भी आप उसे समझ पाने में असमर्थ है।
1. पूजा और अनुष्ठान के सार्थक परिणाम कैसे मिलते है ?
एक बात हमेशा याद रखे कोई भी पूजा या कोई भी अनुष्ठान तभी आपको सार्थक परिणाम देते है जब आपकी भावना निर्मल और पवित्र होगी। अब जो सबसे अहम बात है मैं उसकी चर्चा करती हूँ आप जब किसी से मिलते हो तो पहले आपसे आपका नाम पूछा जाता है यहां तक आपकी डिग्रीयों में भी आपका नाम आवश्यक होता है क्योकि ये प्रमाण है कि आपने इस डिग्री को हासिल किया।
2. किसी भी पूजा अनुष्ठान में बैठने से पूर्व इस बात पर ध्यान दे।
सर्वप्रथम इस बात को अपने दिमाग में रख ले कि आप किसी भी पूजा या कोई भी अनुष्ठान में बैठे तो सबसे पहले अपना नाम और अपना गोत्र अपने मन में अवश्य बोले जो लोग अपना गोत्र नहीं जानते वो कश्यप गोत्र बोल सकते है। अपना नाम और अपना गोत्र लेना आपके लिए बेहद आवश्यक है क्योकि इसके बगैर आपकी पूजा आपका अनुष्ठान अधूरा माना जाता है और आपको इसके बिना अपनी पूजा फल नहीं प्राप्त होता और ना ही आपका संकल्प पूरा होता है, एक अधूरी पूजा और अधूरा संकल्प कैसे किसी को सम्पूर्ण फल दे सकता है।
3. कौन है आपका आंतरिक शत्रु ?
अब आप में से कुछ लोग सोच रहे होंगे मैंने इस लेख में दुर्गा कवच का वर्णन क्यों किया तो आपकी जानकारी के लिए मैं बता दू कि कवच वो ढाल है जो समस्त विपदाओं और बाहरी शत्रुओं से आपकी सुरक्षा करता है मगर जो आपका आंतरिक शत्रु है वो आपके ही भीतर मौजूद है जिससे आपको स्वयं लड़ना है। आपने बड़े शुर वीर राजाओं और योद्धाओं को युद्ध में देखा होगा जब वो अपने शत्रुओं से लड़ने जाते है तो वो अपने तन पर एक सुरक्षा कवच अवश्य पहनते है जो उनकी ढाल बन कर शत्रुओं के वार से उनकी रक्षा करता है उनके शरीर को कोई आघात नहीं पहुंचने देता।
4. दुर्गा कवच कब उल्टा असर दिखाने लगता है ?
ठीक उसी प्रकार दुर्गा कवच आपकी रक्षा करता है नकारात्मक शक्तियों से, बाहरी शत्रुओं और विपदाओं से। मगर ये कवच तभी काम करता है जब आपके अंदर का शत्रु यानि आपके बुरे विकार से आपने निजात पा लिया है, यदि आप गलत विचारों द्वारा किसी के अहित की कामना करते है गलत आदतों को अपनाते है तो ये दुर्गा कवच अपना उल्टा असर दिखाने लगता है अर्थात वो आपको हानि पहुंचाने का कार्य करता है।
दुर्गा के नाम का अर्थ आपको पता होगा ''समस्त दुर्गति का नाश करने वाली। देवी दुर्गा के साधक कभी भी अपनी पूजा और अपने अनुष्ठान को अधूरा छोड़ने की भूल ना करें इस कलयुग में ज्यादातर भक्त बस पंडितों के कहने से किसी भी तरह पूजा और अनुष्ठान को करने का संकल्प ले लेते है मगर उचित नियम, सही अनुष्ठान क्या है इसे कभी समझने का प्रयास नहीं करते फिर खुद को कोसते है क्या मिला पंडितों के कहने पर इतने अनुष्ठान और पूजा कर के ? आज भी जीवन से समस्याएं जाने का नाम नहीं ले रही। खुद को कोसना बंद करो, अपने सोए हुए मन को जगाओ उचित ज्ञान को खुद में संजोने का प्रयास करो यकीनन तुम्हारे सभी प्रश्नों का उत्तर तुम्हें स्वतः ही मिल जाएगा।
देवी दुर्गा का साधक बनना इतना सरल नहीं जितना आप समझते है क्योकि देवी का ये दुर्गा स्वरूप अति क्रोधित स्वरूप है जो दुराचारियों और अधर्मियों का विनाश करती है संसार से दुर्गति को दूर करती है और अपने भक्तों के सभी दुर्गम से दुर्गम काज को पूर्ण करती है ऐसी उग्र प्रचंड शक्ति को प्रसन्न करना सबके बस में नहीं।
5. देवी दुर्गा किस पर कृपालु होती है ?
एकमात्र वही साधक देवी की कृपा पा सकता है जिसमे त्याग,दया, करुणा, क्षमा, सच्चाई और अच्छाई का वास हो। यदि आपमें अनीति,अन्याय बसा है फिर आप दुर्गा कवच का कितना भी पाठ कर ले ये कवच कभी अपना असर नहीं दिखा सकता। इसलिए दुर्गा कवच और देवी दुर्गा का अनुष्ठान वही करें जिनकी भावना जल की भांति निर्मल और पावन है अन्यथा आपकी पूजा आपको विपरीत परिणाम दे सकती है।
आप में से जो देवी दुर्गा के सच्चे भक्त और साधक होंगे वो देवी दुर्गा के कवच के वास्तविक रहस्य से अवगत हो गए होंगे और मेरे द्वारा कही गई बातों के पीछे छिपे गूढ़ रहस्य से भी भली प्रकार अवगत हो गए होंगे।


ReplyDeleteYou gave such wonderful information, I did not know much about this. Thank you from the bottom of my heart.👍
Thank you
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