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1. क्यों है अनिवार्य अनुशासन ?
अनुशासन का हमारी जिंदगी में होना अनिवार्य हैं क्योकि बिना अनुशासन के सभी मायने बेकार हैं। बचपन से युवा तक और युवा से वृद्धावस्था तक अनुशासन का पालन करना सबके लिए अनिवार्य हैं। इसलिए बचपन से ही बच्चो को अनुशासन का पाठ पढ़ाना जरुरी है,जिससे बचपन से ही बच्चो में सही और गलत को समझने का ज्ञान हो सके जिससे वो सभी बुरी आदतों से दूर रह सके और अच्छी आदतों को अपने जीवन में शामिल करे।
माता-पिता को अपने बच्चो के लिए ये विचार कभी नहीं रखना चाहिए कि अभी बच्चे हैं अभी थोड़े और बड़े हो जाएंगे तो अच्छा क्या हैं और बुरा क्या ? खुद सीख जाएंगे। ऐसी सोच रखने वाले माता-पिता को मैं अभी से सावधान करना चाहती हूँ।
बच्चो को उनके बालपन से ही अच्छे और बुरे की समझ से अवगत कराना आपकी जिम्मेदारी हैं ताकि बड़े होने के बाद वो गलत रास्तो से स्वयं को दूर रख सके क्योकि जब आप अपने घर कोई छोटा पौधा लगाते हैं तो उसकी देखभाल भी समय अनुसार ही करना अनिवार्य होता हैं यदि समय अनुसार उस पौधे की उचित देखभाल नहीं की गई तो वो पौधा क्षतिग्रस्त हो सकता हैं।
तुम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओ यदि तुम्हारे अंदर अनुशासन नहीं तो तुम्हे कोई भी सम्मान भरी नजरो से नहीं देखेगा।
2. अनुशासन की प्रथम सीढ़ी कहां से शुरू होती है ?
चाहे घर हो या दफ्तर स्कूल हो या कॉलेज कहीं भी तुम जाते हो तो सबसे पहले लोग तुम्हारे व्यवहार और संस्कार को परखने का प्रयास करते हैं, जहां तक मेरा मानना हैं अनुशासन की प्रथम सीढ़ी तुम्हारे घर से शुरू होती हैं। समय से उठना,समय से हर कार्य करना,अपने बड़े बुजुर्गो का सम्मान करना, पूजा पाठ धार्मिक ज्ञान को अर्जित करना,क्रोध अहंकार से दुरी बना कर रखना,बुरी आदतों को अपने जीवन में कभी शामिल ना करना,किसी का तिरस्कार ना करना,किसी जरूरतमंद की मदद के लिए सदैव तत्पर रहना,ये सभी अनुशासन के अंतर्गत ही आते हैं जिसका पालन अनुशासन प्रिय व्यक्ति करते हैं।
3. अनुशासन का जीवन में महत्व।
अनुशासन ही ज्ञान की सर्वोच्च सीढ़ी हैं,इसके बगैर तुम्हारा सारा ज्ञान अधूरा माना जाता हैं। महात्मा बुद्ध ने भी संसार को यही संदेश दिया हैं एक शांत मस्तिष्क ही ज्ञान की साधना के लिए सुलभ रास्ता माना जाता हैं।
यही वजह थी जो महात्मा बुद्ध ने अपने शांत मस्तिष्क की सहायता से ज्ञान के मार्ग तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ निकाला, और जिस ज्ञान की तलाश में वो इधर उधर घूम रहे थे, अपनी शांत मस्तिष्क और साधना के माध्यम से उस अनमोल ज्ञान की प्राप्ति उन्हें हो गई। मगर इस ज्ञान को पाने के लिए उन्होंने सर्वप्रथम अपने जीवन में अनुशासन का पालन किया।अनुशासन का पालन वही कर सकता हैं जिसे अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा मकाम हासिल करना हैं। अनुशासन ही तुम्हे अपनी जिंदगी में सही दिशा की ओर ले जाने में तुम्हारी मदद करता हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिंदगी में अनुशासन का पालन अवश्य करना चाहिए।
एक बात हमेशा याद रखना जब कोई अनुशासित व्यक्ति कहीं से गुजरता हैं तो वो सबकी नजरो को अपनी ओर स्वतः ही केंद्रित कर लेता हैं लोग उसकी सराहना करते हैं क्योकि लोकप्रियता केवल ऊंचे पद से नहीं बल्कि अनुशासन के पालन से प्राप्त किया जाता हैं,एक अनुशासित व्यक्ति के समक्ष कोई भी कुछ भी अनुचित कहने या करने से सौ बार सोचता हैं क्योकि जो अनुशासन का पालन करता हैं उसके समक्ष कोई भी अन्याय सर नहीं उठा सकता बल्कि अनुशासित व्यक्ति के समक्ष हर अन्याय अपने घुटने टेक देता हैं।
किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन में यदि सफल होना हैं तो सर्वप्रथम उसमे अनुशासन को ग्रहण करने का तथा उसका पालन का प्रतिज्ञा लेनी चाहिए तभी वो अपनी जिंदगी को बदल सकता हैं,क्योकि बेहतर बदलाव लाने के लिए हमे स्वयं में भी बदलाव लाना अनिवार्य होता हैं।

