इस दुनिया में सभी मनुष्य एक सामान नहीं ना ही किसी की सोच और ना ही किसी का व्यवहार एक समान होता हैं। कुछ लोगो की एक बहुत बुरी आदत होती हैं, उन्हें यदि कोई कष्ट या समस्या सताती हैं तो वो इल्जाम भगवान पर लगाते हैं,जब कोई उन्हें तकलीफ पहुंचाता हैं, तब भी वो उस इंसान को जवाब ना दे कर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ देते हैं,वो यही बात कहते हैं भगवान खुद सजा देंगे।
ये तो बहुत ही अजीब बात हैं, कि तुम्हारी हर प्रतिक्रिया का उत्तर भगवान देंगे,जो लोग तुम्हे दस बाते सुना कर चले गए और तुम उन्हें कोई जवाब ना दे कर उन्हें और बढ़ावा देने का काम कर रहे हो और कहते हो तुम्हारे बदले भगवान उसे प्रतिउत्तर और सजा देंगे।
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1. क्या जुल्म सहना भी आपको दोषी बनाता है ?
ये एकमात्र तुम्हारी मूर्खता ही नहीं बल्कि तुम्हारी अज्ञानता भी हैं कि तुम्हारे अंदर इतना साहस नहीं की तुम किसी के सताने पर उसे उसका प्रतिउत्तर दे सको, तुम अन्याय को सह रहे हो और ऐसा सोच रहे हो की तुम बहुत पुण्यात्मा हो भगवान तुमसे अति प्रसन्न हैं,कि तुम किसी के जुल्म को चुपचाप सह रहे हो मगर उसे जवाब नहीं दे रहे हो,ये तुम्हारी महानता का परिचय नहीं बल्कि अज्ञानता का परिचय दे रहा।
क्योकि जुल्म और अन्याय करना जितना बड़ा पाप होता हैं उससे कई ज्यादा जुल्म और अन्याय को सहना,ईश्वर की नजरो में दोनों गुनहगार हैं।
2.क्या वाकई कुछ परेशानियों की वजह मनुष्य खुद होते है ?
यदि मैं कहूं कि हर परेशानी की वजह और दोषी इंसान खुद होता हैं, तो बहुत कम लोग मेरी बातो से सहमत होंगे मुझे पता हैं, खास कर ऐसे लोग जो अपनी हर समस्या का जिम्मेदार भगवान को ठहराते हैं। माना कि तुम व्यवहार और सोच से नेक हो मगर तुम्हारी अच्छाई तभी सार्थक हो सकती हैं जब तुम्हारे अंदर अन्याय को सहने की जगह उस अन्याय का जवाब देने की हिम्मत हो। हर समस्या का हल भगवान नहीं करेंगे कुछ तुम मनुष्यो को भी करना होता हैं, अपने कर्म से तुम मुँह नहीं मोड़ सकते।
गुलाब का पुष्प कांटो के बीच ही रह कर खिलता हैं उसमे इतनी साहस होती हैं, फिर तुम तो इंसान हो तुम एक कोमल पुष्प नहीं जिसे जब मर्जी कोई भी तोड़ कर या कुचल कर चला जाए।
अपनी अज्ञानता को कब दूर करोगे तुम ? स्वयं को सशक्त कब बनाओगे तुम ? तुम भगवान पर कब तक आश्रित रहोगे ?
अपने जीवन के बहुत से सही-गलत फैसले लेते वक्त तो तुम भगवान से नहीं पूछते मगर जब तुम्हारा खुद का निर्णय गलत साबित होता हैं तो तुम भगवान को उसका दोषी मानने की भूल करते हो।
मेरा एक प्रश्न हैं जिसका उत्तर मुझे आज संसार से चाहिए क्या मेरे इस प्रश्न का उत्तर हैं किसी के पास ? मुझे आज सभी मनुष्यो से यही पूछना हैं, क्या तुम सबने भगवान को देखा हैं कभी ? क्या तुमने कभी देखा हैं भगवान का जीवन कैसा होता हैं ? इसका जवाब हैं किसी के पास ?
मैं जानती हूँ किसी में इतनी शक्ति नहीं की वो ईश्वर को अपनी आँखों से देख सके। मेरे प्रश्नों से मुझे कठोर मत समझना ये उन मनुष्यो के लिए हैं जो अज्ञानता के अंधकार से बाहर नहीं आ रहे हैं,जिसे देख मुझे पीड़ा होती हैं, मैं आज सभी मनुष्यो को एक बात कहना चाहूंगी ईश्वर के लिए सभी जीव एक समान हैं चाहे कोई भी हो मगर जब कोई संतान गलत राह पर चल पड़ती हैं तो ईश्वर क्या उसके अन्याय को चुपचाप सहन कर लेते हैं ?
3. कौन सी अज्ञानता आपकी समस्या बन चुकी है ?
ईश्वर तो न्याय की मूर्ति है,जब वो गलत बर्दाश्त नहीं करते हैं,जब वो दुष्टो को उसके कर्मो का दंड देते हैं, तो तुम क्यों अपनी अच्छाई का लोगो को फायदा उठाने दे रहे हो ? मैं ये नहीं कह रही तुम किसी का अहित करो,मगर तुम अन्याय या जुल्म सहन करना बंद करो,उसके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत रखो, फिर देखो कोई भी तुम्हे पीड़ा या कष्ट पहुंचाने की चेष्ठा नहीं करेगा।
भगवान यदि असुरो के अधर्म और पाप को देख कर यदि चुप रहते तो आज इस समस्त ब्रह्मांड में असुरो का आतंक रहता तुम मनुष्यो का जीवन कब का समाप्त हो चुका होता। यदि सही वक्त पर समय रहते किसी की गलतियों के लिए उसे जवाब नहीं दिया गया तो उसकी सह और भी बढ़ जाती हैं इसलिए स्वयं को कमजोर बनाने के स्थान पर स्वयं को सशक्त बनाओ,तथा अपने अज्ञान को मिटा कर अपने ज्ञान की शक्ति से अपने जीवन को सुंदर और सार्थक बनाओ। ऐसा नहीं कि भगवान कुछ नहीं देख रहे,ऐसा नहीं कि भगवान तुमसे दूर हैं,वो किसी भी रूप में हर पल तुम्हारे साथ हैं,उन्हें ढूंढने के स्थान पर महसूस करने का प्रयास करो।
जो तुम बारम्बार भगवान को कोसते हो,यदि सच कहूं तो तुमसे ज्यादा कठिन और पीड़ादायक जीवन भगवान का होता हैं। तुम मनुष्य अपने छोटे से परिवार में थोड़ी सी भी परेशानियों को देख जब विचलित हो जाते हो तो जरा विचार करना इतने बड़े संसार को चलाने वाला कैसे अपने संसार को चला रहा हैं ? कितना कष्ट होता होगा उन्हें जब उनकी ही संतान उनके बनाए संसार को उजाड़ने का प्रयास करे,उनके नियमो के विरुद्ध जाने का साहस करे।

