अकेलेपन से कैसे बाहर आए ?

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 जिंदगी हर किसी के लिए आसान नहीं होती, वैसे ही भीड़ हर किसी की तन्हाई को दूर नहीं कर सकती, अकसर भीड़ में भी हम खुद को अकेला महसूस करते है, अपनों के बीच रह कर भी हम एक खालीपन महसूस करते है, ऐसा नहीं कि हमारे अपनों को हमसे प्यार नहीं और हमे उनसे प्यार नहीं, मगर फिर भी अपनी जिंदगी में हम एक अधूरेपन को महसूस करते है। 




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हमारे जीवन में कई मुश्किलें आती जाती रहती है, कुछ बाते, कुछ समस्याओ को हम अपने तक ही सिमित रखते है,क्योकि हमे ऐसा लगता है कि हमारी वजह से हमारे अपनों को कोई दुःख या तकलीफ ना हो, तो ऐसे में हम खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगते है, आस पास का माहौल चाहे खुशी हो या गम हमे कुछ भी सही नहीं लगता। 


जो लोग दिल से सोचते है, वो अक्सर खुद को जीवन में अकेला पाते है, क्योकि ऐसे लोग कभी किसी का बुरा नहीं सोचते मगर उनके साथ लोग धोखा कर जाते है, जिससे वो अंदर ही अंदर टूट जाते है, और खुद को अकेला महसूस करने लगते है, क्योकि छोटी-छोटी बाते भी सीधे उनके दिल पर लगती है, उन्हें ऐसा लगता है मैं किस दुनिया में आ गया ?


यहां अच्छे इंसानो की कोई कद्र नहीं, जो बुरे है वो खुश है, मगर मैं अच्छा बन कर भी दुखी हूँ। जिन्होंने सबका गलत किया, गलत सोचा वो सुखी समपन्न है, मैंने आज तक सबका अच्छा किया, अच्छा सोचा मगर मैं अपने जीवन में आज अकेला महसूस कर रहा हूँ,मेरे जीवन में कोई खुशी नहीं। 


1. अकेलापन किसके लिए फायदेमंद साबित होता है ?


अकेलापन उनके लिए फायदेमंद होता है, जो अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते है, चाहे वो शिक्षा से जुड़ा हो या करियर से। क्योकि हर जगह पर अकेलापन गलत साबित नहीं होता, ये इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति अकेलेपन को किस तरह अपने जीवन में प्रयोग करता है,ये व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है, क्योकि पढ़ने के लिए, ध्यान और पूजा-पाठ के लिए एकांत आवश्यक माना गया है, शोर में ये आपके लिए कभी फायदेमंद साबित नहीं हो सकता।


जैसे व्यक्ति को कोई जरुरी फैसला करना है तो उसके लिए उस व्यक्ति को गहन विचार करना होगा जो विचार वो सबके समक्ष भीड़ में कदापि नहीं कर सकता उसके लिए अकेले कुछ पल रह कर उसे सोचना होगा,हलचल और भीड़ आपके दिमाग को अशांत करती है। 


मगर जब आप जीवन में किसी कारण कोई दुख या तकलीफ पाते है तो आपका मन किसी स्थान पर नहीं लगता, अपनों के साथ रह कर भी आप खुद को अकेला महसूस करते है, ऐसे लोगो को मैं यही कहूंगी जीवन में दुख और सुख आते जाते रहते है, जिंदगी के सफर में भी कई मुसाफिर आते जाते रहते है, तुम्हे इस बात का दुख है कि कोई ऐसा नहीं जो तुम्हारे दिल की बात जान सके, कोई ऐसा नहीं जो तुम्हे समझ सके, कोई ऐसा नहीं जो तुम्हारे अकेलेपन को दूर कर सके, तो तुम व्यर्थ ही अपनी जिंदगी को दूसरे की खुशियों का मोहताज बनाने का प्रयास कर रहे हो, तुम्हे इस बात का दुख है कि कोई तुम्हारी तरह दिल से नहीं सोचता, तो आज अपने ख्याल को दिल से निकाल दो, क्योकि जिस दिल से तुम सोचते हो उस दिल में क्या तुमने कभी ईश्वर को महसूस करने का प्रयास किया है ? क्या तुमने अपने दिल की पुकार सुनने का प्रयास किया है ?


ईश्वर तुम्हे जानते है,कोई जाने या ना जाने, ईश्वर तुम्हे समझते है, कोई समझे अथवा ना समझे, वो ईश्वर तुम्हे वही प्रदान करेंगे जो तुम्हारे लिए उचित होगा यदि तुमने जीवन में किसी से धोखा खाया है तो ये मान लेना वो तुम्हारे लायक ही नहीं था, यदि तुम्हे किसी जॉब की अभिलाषा थी जो तुम्हे प्राप्त नहीं हुआ तो मान लेना तुम्हारे लिए कुछ बेहतर सोचा है ईश्वर ने। 


2. अकेलेपन से कैसे बाहर आए ? 


तुम अकेले कैसे हुए ? क्या तुम्हे खुद पर विश्वास नहीं ? तुम ये विचार क्यों नहीं करते कि यदि तुम्हे जीवन में प्रसन्न रहना है तो कुछ बातो को नजरअंदाज करना होगा, कुछ बुरी यादो को भुलाना होगा, जो तुम्हे दर्द और घांव दे उसे खुद से दूर करना होगा। अकेलेपन को तुम्हे खुद ही दूर करना होगा, तुमसे बेहतर तुम्हे कोई नहीं समझ सकता, दुनिया में हर कोई एक समान नहीं हो सकता, तुम सोचते हो सब तुम्हारे जैसा सोचे, तुम्हारी तरह जिए तो ये असंभव है। 


जब लोग तुम्हे नहीं समझ रहे तो तुम उन्हें समझना शुरू करो, खुशियों को बांटना शुरू करो फिर देखो तुम्हारा अकेलापन कैसे दूर होता है। फिर जो तुम्हे नहीं समझते है वो भी तुम्हे समझना शुरू कर देंगे। 


नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी ना होने दो, कौन अच्छा कर रहा और कौन बुरा कर रहा इसका फैसला तुम ईश्वर पर छोड़ दो। तुम अपनी खूबसूरत सी जिंदगी को किसी के वजह से क्यों खराब करने की भूल करते हो ? तुम अकेले नहीं क्योकि तुम्हारा हर दुख और पीड़ा ईश्वर से छुपा नहीं। खुद से प्यार करो, अपनों को समझना शुरू करो तुम्हारा अकेलापन कभी तुम पर हावी नहीं होगा। 




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