क्यों नहीं देते लोग तुम्हें अहमियत ?

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 कुछ लोगो को बस एक ही शिकायत रहती है कि उनकी बातों का कोई अहमियत क्यों नहीं देता, क्यों लोग उनकी बातों को नजरअंदाज कर देते है ? क्यों कोई उनकी अहमियत को नहीं समझता ? क्यों अच्छे हो कर भी सबकी नजरों में वो बुरे बन जाते है ? क्यों सम्मान के बदले वो सम्मान प्राप्त नहीं कर पाते ?





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आज मैं इसी मुद्दे पर बात करूंगी ताकि कुछ लोगो को उनके सभी प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो जाए और वो खुद में एक नया बदलाव पाए। 


सबसे अहम बात जो आपको अपने दिल और दिमाग में रख लेना चाहिए वो है कि आप जरूरत से ज्यादा बोलना बंद करे, क्योकि अधिक बोलने वाले इंसान को कोई महत्व नहीं देता, लोग उनकी बातों को खास महत्व नहीं देते और उन्हें नजरअंदाज कर जाते है। 


जैसे अधिक बारिश जब होने लगती है तो लोग उस बारिश से भी बोर हो जाते है, मगर जब अधिक गर्मी पड़ती है और कई दिनों तक जब वर्षा नहीं होती तो लोग उसी बारिश का बेसब्री से इंतेजार करते है कि कब वर्षा हो और उन्हें गर्मी से राहत मिले। गर्मी के दिनों में उस सूरज की किरणों का और उस सूरज का लोग इतना महत्व नहीं देते मगर जब वही सूरज शीत के मौसम में निकलता है तो लोग उसकी किरणों और धूप की गर्मी का आनंद लेते है। 


इस उदाहरण से तुम क्या समझे ? मेरे कहने का तात्पर्य है कि महत्व इंसान का तब होता है जब उसकी जरूरत होती है वरना बिना वजह कोई किसी को महत्व नहीं देता, ये एक कड़वी सच्चाई है। लोग तो भगवान को भी महत्व नहीं देते यदि भगवान के पास इतनी असीम शक्तियां ना होती। फिर तुम तो एक साधारण से मनुष्य हो तुम क्या अपेक्षा करते हो लोगो से ?


मगर मेरी बात यही पर खत्म नहीं होती,अब जो मैं कहने जा रही हूँ वो संसार के सभी मनुष्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है। 


1. क्यों नहीं देते लोग तुम्हें अहमियत ? 


यदि तुम चाहते हो लोग तुम्हारी अहमियत को समझे तो सबसे पहले तुम्हे खुद को अहमियत देना सीखना होगा क्योकि जब तक तुम अपनी अहमियत को नहीं समझते तब तक कोई भी तुम्हारी अहमियत को नहीं समझेगा। तुम्हे अपने अंदर अच्छे गुणों का और अच्छी आदतों का विस्तार करना होगा जिससे कोई भी तुम्हारे अंदर कोई गलती ना निकाले और ना ही कोई तुम्हे कुछ गलत बोलने की चेष्ठा करे। 


सदैव याद रखना अहमियत किसी इंसान की नहीं बल्कि उस इंसान के अंदर बसे गुणों की होती है, यही अटल सत्य है जिसे सबको स्वीकारना ही होगा अन्यथा आजीवन सभी मनुष्य अपनी अहमियत की चिंता में अपना सारा जीवन बस सोचने और विचारने में गवा देंगे मगर उन्हें हासिल कुछ भी नहीं होगा। 


2. इस संसार में कदर किसकी होती है ?


कद्र केवल अच्छे गुणों की होती है,कद्र केवल अच्छे संस्कारों की होती है,कद्र केवल अच्छे व्यवहारों की होती है। 


यदि तुम्हे लोगों की नजरों में अपनी अहमियत को बढ़ाना है तो अच्छे गुणों को अपने अंदर समावेश करना सीखो, अधिक बोलना बंद करो,अपने जीवन और अपने भविष्य को अहमियत देने की आदत डाल लो, जिन्हे तुम्हारी सलाह पसंद नहीं आती उन्हें अपनी सलाह और मशवरा देना बंद करो। फिर देखो लोग कैसे तुम्हे अहमियत नहीं देते, लोग खुद तुम्हारी सही अहमियत को जान जाएंगे, क्या है तुम्हारी अहमियत लोग इस बात को भी समझ जाएंगे। 



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