सत्य से हो जाओ परिचित।

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 चाहे भारत हो या विदेश,चाहे सनातन धर्म हो या इस्लाम, चाहे तुम किसी भी धर्म या जाति से ताल्लुक रखते हो मगर हो तो सभी मनुष्य फिर क्यों एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को देखना पसंद नहीं करता ? क्यों है तुम्हे एक दूसरे से घृणा ? यदि तुम्हारे जीवन का असल सत्य सामने आ गया तो तुम्हे एक दिन स्वयं से ही घृणा होने लगेगी और सत्य जानने के बाद तुम कभी ईश्वर से नजरे नहीं मिला पाओगे। 





मैं हर दिन एक ही विचार करती हूँ आखिर कब संसार के सभी मनुष्य सत्य को स्वीकारेंगे ? कब वो एक दूसरे के लिए पल रही नफरत को अपने दिल से मिटाएंगे ? कब संसार से जातिवाद,भेदभाव दूर होगा ?कब मानव दानव से इंसान बनेगा ?


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1.क्या आप संसार के सत्य से परिचित है ?


ये एकमात्र लेख नहीं ये सभी मनुष्य के जीवन का सत्य है, हमेशा से मैं यही सोचती थी कि ये संसार जिस बर्बादी की तरफ बढ़ रहा उसका बहुत भयंकर परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेगा, यदि मैं अपनी हर बातो को अपने विचारो को स्वयं तक ही सिमित रखती तो मैं अपने जीवन के उदेश्य से स्वयं को दूर रखती, मेरे जीवन का हमेशा से एक ही उदेश्य रहा है, वो उदेश्य है संसार की रक्षा करना,अधर्म और पाप करने से मनुष्यो को रोकना ताकि भविष्य में सभी मनुष्य सुरक्षित रहे, क्योकि जो अधर्म और पाप मनुष्य कर रहे है,वो एक भयंकर तबाही को अपनी अज्ञानता से आमंत्रित करने की भूल कर रहे है। 


आज मैं समस्त संसार वासियों से एक बात पूछना चाहूंगी यदि आपके घर में आपके किसी सदस्य को कोई हानि पहुंचाने का प्रयास करता है, तो आपको बहुत दुख होता है, क्योकि आपके लिए आपका परिवार ही सब कुछ है, मगर मुझे ये बताओ कि जब सभी मनुष्य को ईश्वर ने ही बनाया है,तो तुम सभी मनुष्य एक दूसरे से भिन्न कैसे हो सकते हो ? कैसे तुम अपने ही परिवार के शत्रु बन सकते हो ? कैसे तुम अपने परिवार से घृणा और नफरत कर सकते हो ? कैसे तुम किसी दूसरे मनुष्य की निर्ममता से हत्या कर सकते हो ? कैसे तुम अपने ही परिवार को हानि पहुंचा सकते हो ?कैसे तुम अपने परिवार में धर्म और जातिवाद का विवाद कर सकते हो ? कैसे तुम अपने ही परिवार के बीच भेदभाव की दीवार खड़ी कर सकते हो ?


इस भेदभाव और जातिवाद ने ना जाने कितने घरो को तबाह कर डाला,इस भेदभाव और नफरत के कारण ना जाने कितने लोग अपना जीवन गवा बैठे। तुम अपनों का ही खून बहा रहे हो, और खुश हो कर जीत का जश्न मना रहे हो, तुम स्वयं ही खुद के लिए खाई का निर्माण कर रहे हो। 


2. क्या है सभी मनुष्यों का सच ?


उस परमपिता परमात्मा ने तुम सभी मनुष्यो को एक दूसरे से भिन्न नहीं बनाया, दो आंखे, दो कान,दो पैर तुम सभी मनुष्यो को प्रदान किया, क्या तुमने इस बात पर कभी विचार नहीं किया कि आखिर क्यों सभी मनुष्यो के शरीर की संरचना एक दूसरे से भिन्न नहीं, यहां तक खून का रंग भी एक समान है, फिर क्यों एक मनुष्य दूसरे मनुष्य को हानि पहुंचा रहा ?


3. दिव्यता कहां मौजूद रहती है ?


जहां पवित्रता नहीं होती वहां कोई दैवीय ऊर्जा निवास नहीं कर सकती, फिर तुम क्यों कहते फिरते हो कि कलयुग में भगवान की शक्ति काम नहीं कर रही ? तुम्हे क्या लगता है, भगवान सबके क्रियाकलाप से अवगत नहीं ? भगवान प्रत्येक मनुष्य के सभी क्रियाकलाप से परिचित है, मगर वो अपनी संतानो से  दुखी और रुष्ट है, ईश्वर दिन रात यही विचार करते है कि मेरे द्वारा बनाए गए संसार को मेरी ही संतान कैसे बर्बाद कर सकती है ? मगर वो सबको एक बार मौका देते है,ताकि उनकी संतान संभल जाए, सत्य से परिचित हो जाए ताकि ये संसार बर्बाद होने से बच जाए। 


कब, किस रूप में ईश्वर परीक्षा लेंगे इसका अनुमान किसी को नहीं हो सकता,जब तक तुम मनुष्य ईश्वर को पहचानोगे, तब तक ईश्वर अपना कार्य सम्पूर्ण कर चले जाएंगे। 




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