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1. आपकी सफलता की चाबी कहां है ?
जिनके चरणों में है हमारी सफलता की चाभी, उनके पावन चरणों को छू कर दूर होती है हर दुर्गति, उनकी सेवा से प्राप्त होती है हमें जीवन में प्रसिद्धि, माता पिता के साए में ही पल कर होता है हमें एहसास ईश्वर के सानिध्य का, फिर क्यों इस कलयुग में भुला बैठी संतान महत्व और महिमा माता पिता की।
कभी अकेले में क्यों नहीं सोचते यदि माता पिता ना होते तो आज क्या तुम इस काबिल होते ? यदि माता पिता ना होते तो इस दुनिया में तुम्हें कौन जानता ? यदि माता पिता ना होते तो तुम्हें अपने नाम और अपनी पहचान का बोध कैसे होता ?
इस दुनिया में ना जाने कितने ऐसे माता पिता है जिनकी संतान होते हुए भी उन्हें मजबूरन किसी अनाथ आश्रम में रहना पड़ रहा है, अपनी जिस संतान को उन्होंने अपना सब कुछ मान कर उन्हें पढ़ा लिखा कर इस काबिल बनाया कि वो कभी उस दुख को ना देखे जो दुख और कष्ट उनके माता पिता ने देखा और सहन किया ताकि उनके बच्चे अपना भविष्य बेहतर बना सके।
मगर बहुत ही दुख के साथ मुझे ये कहना पड़ रहा है, यदि संतान के होने से भी माता पिता को अपने बुढ़ापे में दूसरो से मदद की गुहार लगानी पड़ रही है, तो ऐसी संतान का ना होना ही बेहतर था। ये समय का खेल है, आज जिस युवा अवस्था में तुम हो कल वो बढ़ती उम्र के साथ तुम्हारे बुढ़ापे में बदल जाएगा सोचो फिर तुम्हारे साथ क्या होगा ?
क्योकि तुमने जो कर्म किए है, जो पीड़ा अपने माता पिता को दिया वही कष्ट तुम्हें अपने बुढ़ापे में देखने को मिलेगा, तब तुम्हें अपने माता पिता के कष्ट और दुख की अनुभूति होगी, फिर तुम आंशु बहाओ या क्षमा मांगो इससे तुम्हारा पाप नहीं धूल जाएगा, क्योकि तुमने जो कर्म किया है, वो तो एक ना एक दिन लौट कर तुम्हारे पास आएगा ही क्योकि कर्म मनुष्य की परछाई बन कर उसके साथ साथ चलता है।
2. माता पिता की महिमा।
ईश्वर की करुणा और आर्शीवाद भी उसे ही प्राप्त होता है जो अपने माता पिता तथा बड़े बुजुर्गो की अहमियत को समझता है। जैसे एक बगीचे की शोभा हरे भरे पेड़ पौधे और पुष्पों से होती है ठीक वैसे हमारे घर की सुख, समृद्धि और रौनक हमारे माता पिता बड़े बुजुर्गो से होती है, जैसे आप अपने बगीचे की रखवाली करते है, कि कहीं हरे भरे पेड़ पौधे और पुष्प सूख ना जाए, उसी प्रकार आपको इस बात को भी समझना चाहिए।
कि जिस माता पिता को आप बोझ समझ रहे है, वो आपके संरक्षक है, आपके घर की रौनक है, यदि वो आपसे दूर हुए तो आपके शीश से आशीर्वाद का हाथ हट जाएगा, आपको संरक्षण प्रदान करने वाला आपसे दूर हो जाएगा, इसलिए समय रहते अपने माता पिता और बड़े बुजुर्ग दादा दादी की अहमियत और उनकी महिमा को समझ जाए अन्यथा आजीवन आप प्राश्चित की अग्नि में जलते रहोगे।

